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धर्म क्या है।

गीता में कर्तव्य को ही धर्म कहा है। भगवान कहते हैं कि अपने कर्तव्य को पूरा करने में कभी भी लाभ-हानि का विचार नहीं करना चाहिए। https://secure.avaaz.org/en/community_petitions/how_to_get_your_ex_back_91_9928525459_bronx_new_yo_how_to_get_your_ex_back_91_9928525459_bronx_new_york/details/ https://secure.avaaz.org/en/community_petitions/how_to_get_my_girlfriend_back_by_dua_91_9928525459_how_to_get_my_girlfriend_back_by_dua_91_9928525459_cardiff_wales/details/ https://secure.avaaz.org/en/community_petitions/how_to_get_my_ex_boyfriend_back_when_hes_ignoring__how_to_get_my_ex_boyfriend_back_when_hes_ignoring_me_by_wazifa_91_9928525459_quebec_que/details/ https://secure.avaaz.org/en/community_petitions/girlfriend_or_boyfriend_ki_shadi_todne_ke_upay_91__girlfriend_or_boyfriend_ki_shadi_todne_ke_upay_91_9928525459_san_diego_california/details/ https://secure.avaaz.org/en/community_petitions/wazifa_girlfriend_ki_shadi_todne_ki_dua_91_9928525_wazifa_gir...

श्रीमद्‍भगवद्‍गीता का महत्व

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श्रीमद्‍भगवद्‍गीता का महत्व कल्याण की इच्छा वाले मनुष्यों को उचित है कि मोह का त्याग कर अतिशय श्रद्धा-भक्तिपूर्वक अपने बच्चों को अर्थ और भाव के साथ श्रीगीताजी का अध्ययन कराएँ। स्वयं भी इसका पठन और मनन करते हुए भगवान की आज्ञानुसार साधन करने में समर्थ हो जाएँ क्योंकि अतिदुर्लभ मनुष्य शरीर को प्राप्त होकर अपने अमूल्य समय का एक क्षण भी दु:खमूलक क्षणभंगुर भोगों के भोगने में नष्ट करना उचित नहीं है। गीताजी का पाठ आरंभ करने से पूर्व निम्न श्लोक को भावार्थ सहित पढ़कर श्रीहरिविष्णु का ध्यान करें-- शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।  लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं  वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।। भावार्थ :  जिनकी आकृति अतिशय शांत है, जो शेषनाग की शैया पर शयन किए हुए हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो ‍देवताओं के भी ईश्वर और संपूर्ण जगत के आधार हैं, जो आकाश के सदृश सर्वत्र व्याप्त हैं, नीलमेघ के समान जिनका वर्ण है, अतिशय सुंदर जिनके संपूर्ण अंग हैं, जो योगियों द्वारा ध्यान करके प्राप्त किए जाते हैं, जो संपूर्ण...